बिंदु और डिब्बे · पूरी गाइड
बिंदु और डिब्बे: कैसे खेलें, कहाँ से आया और कैसे जीतें
कॉपी के पीछे की लकीरों जैसा खेल, पर इसके पीछे गंभीर सिद्धांत है — फ़ैसला आख़िरी दौर में होता है।
बिंदु और डिब्बे बिंदुओं के जाल पर खेला जाता है। बारी-बारी दो पास वाले बिंदुओं को जोड़ा जाता है; जो किसी वर्ग की चौथी भुजा बंद करे, वह डिब्बा उसका और वह फिर चलता है। सारी लकीरें खिंच जाने पर जिसके डिब्बे ज़्यादा, वह जीतता है।
इसे फ़्रांसीसी गणितज्ञ एदुआर लुकास ने बनाया — वही जिन्होंने हनोई की मीनार वाली पहेली गढ़ी — और 1889 में La Pipopipette नाम से प्रकाशित किया। तब से यह दुनिया भर की कॉपियों के आख़िरी पन्नों पर ज़िंदा है।
सब कुछ एक सिद्धांत पर टिका है: कभी तीसरी भुजा मत दीजिए, क्योंकि सामने वाला डिब्बा ले लेगा और चलता रहेगा। शुरू में यह आसान है; फिर सुरक्षित लकीरें ख़त्म होती हैं, बिसात कड़ियों में टूटती है, और किसी को एक कड़ी खोलनी ही पड़ती है। जिसे मजबूरन खोलनी पड़े, वह अक्सर हार जाता है।
अच्छे खिलाड़ी एक क़दम आगे जाते हैं क़ुर्बानी से: कड़ी के अंत में वे जान-बूझकर दो डिब्बे सामने वाले को दे देते हैं, ताकि अगली कड़ी उसे खोलनी पड़े। दो डिब्बे गए, बाज़ी जीत ली — यहीं यह लकीरबाज़ी सच्चा रणनीतिक खेल बन जाती है।
कैसे खेलें
एक लकीर खींचिए, एक डिब्बा बंद कीजिए, फिर चलिए। नियम पंद्रह सेकंड के हैं — और फिर आख़िरी दौर काग़ज़-पेंसिल के खेलों की सबसे चौंकाने वाली रणनीतिक पहेलियों में बदल जाता है।
आम सवाल
इस खेल को किसने बनाया?
फ़्रांसीसी गणितज्ञ एदुआर लुकास ने, जिन्होंने इसे 1889 में La Pipopipette नाम से प्रकाशित किया।
डिब्बा जीतने पर फिर बारी मिलती है?
हाँ, हर जीते डिब्बे पर एक और बारी, इसलिए पूरी कड़ी ली जा सकती है।
जीतने का राज़ क्या है?
कभी तीसरी भुजा मत दीजिए; और आख़िरी दौर में दो डिब्बे क़ुर्बान कीजिए ताकि अगली कड़ी सामने वाले को खोलनी पड़े।
क्या बराबरी हो सकती है?
सिर्फ़ उस बिसात पर जिसमें डिब्बों की गिनती सम हो।
क्या मुफ़्त ऑनलाइन खेल सकते हैं?
हाँ — आप यहीं मुफ़्त खेल सकते हैं, कंप्यूटर के ख़िलाफ़ या किसी को लिंक भेजकर।
गाइड
बिंदु और डिब्बे अभी मुफ़्त खेलें
न साइन-अप, न डाउनलोड — यह आपके ब्राउज़र में ही चलता है: कंप्यूटर के ख़िलाफ़, उसी डिवाइस पर किसी दोस्त के साथ, या ऑनलाइन किसी दोस्त के साथ।